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अभिलेख

1998 से चीनी के संबंध में लिए गए प्रमुख निर्णय

  • 1. चीनी उद्योग वर्ष 1998 में लाइसेंस मुक्‍त हुआ था। परन्‍तु रिलीज तंत्र के माध्‍यम से चीनी पर आंशिक नियंत्रण जारी रहा जिसके अंतर्गत प्रत्‍येक चीनी मौसम के लिए लेवी:गैर-लेवी अनुपात निर्धारित किया गया तथा चीनी मिलों द्वारा चीनी मौसम (अक्‍तूबर-सितंबर) में उत्‍पादित चीनी पर लेवी बाध्‍यता लगाई जाती रही।
  • 2. 30.09.2012 के बाद उत्‍पादित चीनी से चीनी मिलों पर लेवी चीनी बाध्‍यता के उन्‍मूलन के साथ, सरकार द्वारा 01.06.2013 से नई स्‍कीम को लागू किया गया है जिसके द्वारा राज्‍य सरकारें/संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रशासन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत वितरण के लिए 13.50 रू़ प्रति किग्रा. के वर्तमान खुदरा निर्गम मूल्‍य (आरआईपी) पर चीनी की खुले बाजार से खरीद करती है तथा केन्‍द्रीय सरकार 18.50 रू़ प्रति किग्रा. की संबंधित राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र के निर्धारित लेवी चीनी कोटा तक सीमित निश्‍चित चीनी राजसहायता प्रदान करती है। केन्‍द्रीय सरकार में अब 01.10.2012 को या इसके बाद उत्‍पादित चीनी पर संबंधित चीनी मिलों को मासिक लेवी चीनी रिलीज आदेशों को जारी करने की प्रणाली को बंद कर दिया है। इस प्रकार, राज्‍य सरकार/संघ राज्‍य क्षेत्र को केन्‍द्रीय सरकार द्वारा निर्धारित मासिक लेवी चीनी कोटा के अंतर्गत वितरण के लिए चीनी को देश में स्‍थित किन्‍हीं भी चीनी मिलों से उनके वाणिज्‍यक विवेक पर निर्भर करते हुए खुले बाजार से खरीद करनी होगी और निर्धारित मासिक लेवी चीनी कोटा के अनुसार अपने राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र में लेवी चीनी के वितरण के लिए कार्रवाई करनी होती है। एनआईसी की मदद से राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा त्रैमासिक आधार पर राजसहायता क्षेत्रों को प्रस्‍तुत करने के लिए आनलाइन माड्यूल स्‍थापित कर दिया गया है।
  • 3. प्रोफार्मा-II में चीनी पर आंकड़े/सांख्‍यिकी एकत्रित करने के लिए वैब आधारित प्रणाली के विकास के साथ विवरणी I से IV तक वार्षिक विवरणी में तथा गन्‍ने और चीनी उत्‍पादन के अनुमानों को अब चीनी मिलों से आन लाइन एकत्र किया जा रहा है।

2007 से खाद्य तेलों और वसाओं के संबंध में लिए गए प्रमुख निर्णय

  • 1. दिनांक 24.1.2007 की अधिसूचना सं. सीयूएस एनटीएफ नं. 08/2007 के प्रभाव से कच्‍चे पाम आयल/कच्‍चे पामोलीन पर आयात शुल्‍क 70% से घटाकर 60%, परिष्‍कृत पाम आयल/आरबीडी पामोलीन पर आयात शुल्‍क 80% से घटाकर 67.5%, कच्‍चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्‍क 75% से घटाकर 65% और परिष्‍कृत सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्‍क को 85% से घटाकर 75% कर दिया गया है।
  • 2. 01.03.2007 से कच्‍चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्‍क को 65% से घटाकर 50% तथा परिष्‍कृत सूरजमुखी तेल और अन्‍य तेलों पर आयात शुल्‍क को 75% से घटाकर 60% कर दिया गया है। इसके अलावा, खाद्य तेल (सोयाबीन तेल, सफेद सरसों का तेल और सरसों के तेल के अलावा) कुल सीमा शुल्‍क का 3% शिक्षा उपकर लगेगा। 1.3.2007 से सभी खाद्य तेलों पर 4% की दर से विशेष अतिरिक्‍त सीमा शुल्‍क नहीं लगेगा।
  • 3. 13.4.07 से कच्‍चे पाम आयल/कच्‍चे पामोलीन पर आयात शुल्‍क 60% से घटाकर 50% तथा परिष्‍कृत पाम आयल/आरबीडी पर आयात शुल्‍क को 67.5% से घटाकर 57.5% कर दिया गया है।
  • 4. 23.7.2007 से कच्‍चे पाम आयल/कच्‍चे पामोलीन तथा परिष्‍कृत पाम आयल/ पामोलीन पर आयात शुल्‍क को क्रमश: 50% से घटाकर 45% और 57.5% से घटाकर 52.5% कर दिया गया है तथा कच्‍चे तथा परिष्‍कृत सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्‍क को क्रमश: 50% से घटाकर 40% और 60% से घटाकर 50% किया गया है और कच्‍चे और परिष्‍कृत सोयाबीन तेल पर आयात शुल्‍क को 45% से घटाकर 40% किया गया है।
  • 5. दिनांक 12.06.2000 तथा 21.04.2003 के पिछले आदेश जिनमें वनस्‍पति बनाने के लिए घरेलू तेलों का न्‍यूनतम स्‍तर का प्रयोग और एक्‍सपैलर सरसों तेल का अधिकतम स्‍तर पर प्रयोग करने की शर्तें थी, वनस्‍पति तेल उत्‍पाद (विनियमन) आदेश, 1998 के प्रावधानों के अंतर्गत दिनांक 11.2.2008 के आदेश सं45-वीपी(2)/99 से समाप्‍त कर दिया गया है। इस प्रकार आज की तारीख को वनस्‍पति के निर्माण में एक्‍सपैलर सरसों के तेल सहित घरेलू तेलों के प्रयोग की अनिवार्य बाध्‍यता नहीं है।
  • 6. 21.03.2008 से कच्‍चे पाम आयल/पामोलीन और परिष्‍कृत पाम तेल/पामोलीन पर सीमाशुल्‍क को क्रमश: 45% से घटाकर 20% तथा 52.5% से घटाकर 27.5% और कच्‍चे और परिष्‍कृत सरसों/सफेद सरसों के तेल पर सीमा शुल्‍क को क्रमश: 75% से घटाकर 20% तथा 75% से घटाकर 27.5% कर दिया गया है।
  • 7. 01 अप्रैल, 2008 से पाम आयल, पामोलीन, पाम गरी तेल, सोयाबीन तेल, सफेद सरसों/सरसों तेल, सूरजमुखी तेल, कुसुम तेल, मूंगफली तेल, नारियल तेल तथा कुछ अन्‍य वनस्‍पति तेलों के कच्‍चे और परिष्‍कृत रूपों में वित्‍त मंत्रालय, राजस्‍व विभाग द्वारा जारी अधिसचूना सं.42/2008-सीमा शुल्‍क के तहत क्रमश: घटकार शून्‍य और 7.5% कर दी गई है।
  • 8. डीजीएफटी ने अधिसचूना सं.122/2008-सीमा शुल्‍क के तहत चिपचिपाहट रहित सोयाबीन तेल पर सीमा शुल्‍क 18.11.2008 से बढ़ाकर 20% किया है। परन्‍तु, डीजीएफटी में अधिसचूना सं.27/2009-सीमा शुल्‍क को घटकार शून्‍य कर दिया गया है। कच्‍चे तेलों पर 0% और परिष्‍कृत तेलों पर 7.5% की शुल्‍क संरचना जारी है।
  • 9. डीजीएफटी ने दिनांक 17 मार्च, 2008 की अधिसचूना सं. 85(आर ई-2007) /2004-2009 के तहत अनुसूची-I के पाठ 15 के अंतर्गत सभी खाद्य तेलों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। तथापि, एरण्‍डी तेल(अखाद्य ग्रेड का), नारियल तेल (कोचीन बंदरगाह के माध्‍यम से) तथा लघु वन मूल के उत्‍पादित निश्‍चित तेलों (अर्थात् कोकुम तेल/वसा, साल तेल/वसा/स्‍टेराइन, धूप तेल, निमौरी का तेल, काले तिल का तेल, आम गरी तेल/स्‍टेराइन/ओलेइन,संशाधित या परिष्‍कृत) पर वाणिज्‍य विभाग द्वारा एक वर्ष की अवधि के लिए दिनांक 1.4.2008 की अधिसचूना सं.92(आर ई-2007)/2004-2009 के तहत निर्यात प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। दिनांक 17.4.2009 की अधिसचूना सं.98(आर ई-2008)/2004-2009 के तहत निर्यात पर बंदिश को 16.03.2010 तक बढ़ाया गया है। डीजीएफटी ने अधिसचूना सं.39(आर ई-2008)/2004-2009 के तहत 20.11.2008 से मछली का तेल निर्यात करने की अनुमति प्रदान की थी। अधिसचूना सं.98(आर ई-2008)/2004-2009 के तहत लगाई बंदिश को 30.09.2010 तक दिनांक 4 सितंबर, 2010 की अधिसचूना सं.04/2009-2014 के तहत बढ़ाया गया। दिनांक 4.9.2009 की अधिसचूना सं.04/2009-2014 की अधिसचूना सं.04/2009-2014 के तहत लगाई बंदिश को 30.09.2011 तक दिनांक 30 सितंबर, 2010 की अधिसचूना सं.07(आरई-2010)/2009-2014 के तहत बढ़ाया गया। अधिसचूना सं.77(आरई-2010)/2009-2014, दिनांक 28 सितंबर, 2011 के तहत खाद्य तेलों के आयात पर बंदिश उपर्युक्‍त छूट के साथ 30.09.2012 तक बढ़ाया गया। अधिसचूना सं.24(आरई-2012)/2009-2014 दिनांक 19 अक्‍तूबर, 2012 के तहत खाद्य तेलों के निर्यात पर बंदिश को अगले आदेशों तक बढ़ा दिया गया है।
  • 10. डीजीएफटी ने अधिसचूना सं.60(आरई-2008)//2004-09 के तहत 5 किग्रा. तक के ब्रान्‍डेड उपभोक्‍ता पैकों में दिनांक 20.11.2008 से खाद्य तेलों के निर्यात की अनुमति प्रदान की है बशर्ते कि अगले एक वर्ष के दौरान 31.10.2009 तक इसकी सीमा 10000 टन तक ही सीमित हो। इसे 1.11.2009 से 31.10.2010 तक बढ़ाया गया और फिर 1.11.2010 से 31.10.2011 तक बढ़ाया गया। अधिसचूना सं.77(आरई-2010)//2009-14 दिनांक 28 सितंबर, 2011 के तहत ब्रांडेड उपभोक्‍ता पैकों में 10,000 टन तक की सीमा के लिए खाद्य तेलों के निर्यात को 1.11.2011से 31.10.2012 तक बढ़ाया गया। खाद्य तेलों के निर्यात पर लगी बंदिश को 17.03.2008 से अगले आदेशों तक अधिसचूना सं.24(आरई-2012)//2009-14 दिनांक 19 अक्‍तूबर, 2012 तक बढ़ाया गया। अधिसचूना सं.32(आरई-2012)//2009-14 दिनांक 5 फरवरी, 2013 के तहत एरण्‍डी का तेल, नारियल का तेल को सभी ई डी आई बंदरगाहों तथा लैण्‍ड कस्‍टम स्‍टेशनों (एलसीएस), के माध्‍यम से उप वन उत्‍पादों से उत्‍पादित कुछ खास तेलों को खाद्य तेलों के निर्यात पर लगी रोक से छूट दी गई तथा 05 किग्रा. तक के ब्रांडेड उपभोक्‍ता पैकों में खाद्य तेलों के निर्यात को 1500 प्रति टन यूएसडी के न्‍यूनतम निर्यात मूल्‍यों पर अनुमति प्रदान की गई। इसके अलावा, अधिसचूना सं.45(आरई-2013)//2009-14 दिनांक 9 अक्‍तूबर, 2013 के तहत, खाद्य तेलों के 05 किग्रा. तक के ब्रांडेड उपभोक्‍ता पैकों के निर्यात पर एमईपी घटाकर 1400 प्रति मी.टन यूएसडी किया गया। इसे अधिसचूना सं.80(आरई-2013)//2009-14 दिनांक 30 अप्रैल, 2014 के तहत फिर घटाकर 1100 यूएसडी तक कर दिया गया है।
  • 11. राज्‍य सरकारों को खाद्य तेलों/तिलहनों पर 7 अप्रैल, 2008 से स्‍टाक प्रतिबंधों को दुबारा लगाने के लिए प्राधिकृत किया गया जिसे 30.09.2015 तक बढ़ाया गया।
  • 12. खाद्य तेलों की बढ़ती हुई कीमतों से समाज के गरीब तबके को राहत प्रदान करने के क्रम में केन्‍द्रीय सरकार ने 2008-09 में 10 लाख टन खाद्य तेलों के वितरण की राज्‍य सरकारों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के माध्‍यम से प्रति राशन कार्ड पर 01 किग्रा. के लिए 15/- रूपये प्रति किलोग्राम की राजसहायता की स्‍कीम लागू की। इस स्‍कीम को 2009-10, 2010-11, 2011-12 के लिए बढ़ाया गया तथा फिर 2012-13 में 30.09.2013 तक बढ़ाया गया। इस स्‍कीम के कार्यान्‍वयन के बाद खाद्य तेलों की कीमतों में भारी गिरावट आई और गरीब तबके को खाद्य तेल राजसहायता दरों पर प्रदान किए गए।
  • 13. अण्‍डर-इन्‍वोइसिंग के जरिए खद्य तेलों का आयात रोकने के क्रम में सरकार ने उनके आयात पर वित्‍त मंत्रालय द्वारा जारी समय-समय पर संशोधित वित्‍त मंत्रालय की अधिसूचना के तहत टैरिफ वैल्‍यू निर्धारित की थी। सरकार ने 2006 से फ्रीज पड़ी टैरिफ वैल्‍यू को चालू अंतर्राष्‍ट्रीय कीमतों के समान लाने हेतु डिफ्रीज करने का निर्णय लिया जिससे खाद्य तेलों की उपलब्‍धता में वृद्धि और रिफाइनिंग उद्योग की उपयोग क्षमता अच्‍छी बन सके। टैरिफ वैल्‍यू अर्द्धमासिक रूप से संशोधित किए जाती है।
  • 14. इस विभाग की व्‍यवसाय नियमावली की बाध्‍यताओं को पूरा करने के क्रम में आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम, 1955 के भाग 3 के अंतर्गत एक नया आदेश अर्थात वनस्‍पति तेल उत्‍पाद उत्‍पादन और उपलब्‍धता (विनियमन) आदेश 2011 (2011 का जीएसआर-664ई) 7 सितंबर, 2011 को अधिसूचित हुआ।
  • 15. दिनांक 23 जनवरी, 2013 की अधिसचूना के तहत कच्‍चे खाद्य तेलों पर आयात शुल्‍क को 0% से बढ़ाकर 2.5% कर दिया गया है।
  • 16. दिनांक 20 जनवरी, 2014 की अधिसचूना सं. 02/2014-सीमा शुल्‍क के तहत परिष्‍कृत खाद्य तेलों पर आयात शुल्‍क 7.5% से बढ़ाकर 10.0% कर दिया गया है। दिनांक 24 दिसंबर, 2014 की अधिसचूना सं. 34/2014-सीमा शुल्‍क के तहत कच्‍चे तेलों पर आयात शुल्‍क को 2.5% से बढ़ाकर 7.5% तथा परिष्‍कृत खाद्य तेलों पर 10.0% से बढ़ाकर 15.0% कर दिया गया है।