• पिछला अद्यतनीकृतः: 15 अक्तूबर 2019
  • मुख्य सामग्री पर जाएं | स्क्रीन रीडर का उपयोग | A A+ A++ | |
  • A
  • A

सामान्य नीति

गन्‍ना मूल्‍य निर्धारण नीति

दिनांक 22.10.2009 को गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में संशोधन करने के साथ,गन्ने के सांविधिक न्यूनतम मूल्य की अवधारणा के स्थान पर2009-10 और बाद के चीनी मौसमों के लिए गन्ने के ‘उचित और लाभकारी मूल्य’ की अवधारणा लाई गई थी। केन्द्रीय सरकार द्वारा कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर और राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श के पश्चात तथा चीनी उद्योग की एसोसिएशनों से सूचना लेकर गन्ना मूल्य निर्धारित किया जाता है और उसकी घोषणा की जाती है। गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के संशोधित उपबंधों में निम्नलिखित घटकों को ध्यान में रखते हुए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य निर्धारित करने का प्रावधान है:-

क. गन्ने की उत्पादन लागत;

ख. वैकल्पिक फसलों से उत्पादकों को लाभ तथा कृषि जिंसों के मूल्यों की सामान्य प्रवृत्ति;

ग. उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी की उपलब्धता;

घ. उत्‍पादनकर्ताओं द्वारा गन्ने से उत्पादित चीनी जिस मूल्य पर बेची जाती है;

ङ. गन्ने से चीनी की रिकवरी;

च. सह-उत्पादों अर्थात शीरा,खोई तथा प्रैस मड के विक्रय से प्राप्त राशि या उनके अभ्यारोपित मूल्य (29.12.2018 की अधिसूचना द्वारा अंत:स्थापित)

छ. जोखिम और लाभ के कारण गन्‍ना उत्‍पादकों के लिए उचित मार्जिन (22.10.2009 की अधिसूचना द्वारा अंत:स्‍थापित)

उचित और लाभकारी मूल्य की प्रणाली के अधीन,किसानों को मौसम के अंत की अथवा चीनी मिलों या सरकार द्वारा लाभों की किसी घोषणा की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। नई प्रणाली में इस तथ्य का ख्याल किए बिना किसानों को लाभ और जोखिम के प्रति मार्जिन भी आश्वस्त किए गए हैं कि भले ही चीनी फैक्ट्रियों को लाभ होता है या नहीं और ये किसी चीनी मिल विशेष के कार्य निष्पादन पर निर्भर नहीं है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि अपेक्षाकृत अधिक चीनी रिकवरियों का पर्याप्त रूप से प्रतिफल दिया जाता है और चीनी मिलों के बीच विभिन्नताओं पर विचार करते हुए,गन्ने से चीनी की अधिक रिकवरी के लिए किसानों को देय प्रीमियम के साथ उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) चीनी की मूल रिकवरी दर से सम्बद्ध हैं।

तदनुसार, चीनी मौसम 2018-19 के लिए उचित और लाभकारी मूल्‍य 275 रुपये प्रति क्‍विंटल निर्धारित किया गया है, जो 10 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर से संबद्ध है, जो 10 प्रतिशत से अधिक रिकवरी पर प्रत्‍येक 0.1 प्रतिशत की वृद्धि के लिए 2.75 रुपये प्रति क्विंटल के प्रीमियम के अध्यधीन है और 9.5% तक रिकवरी में 0.1 प्रतिशत की गिरावट के लिए एफआरपी में उसी दर पर कमी के अध्यधीन है। सरकार ने किसानों के हित के संरक्षण की दृष्‍टि से यह निर्णय लिया है कि उन मिलों के मामले में कोई कटौती नहीं की जाएगी, जिनकी रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है। ऐसे किसानों को वर्तमान मौसम में गन्‍ने के लिए 261.25 रूपये प्रति क्‍विंटल का मूल्‍य मिलेगा।

चीनी कारखानों द्वारा 2009-10 से 2018-19 तक प्रत्येक चीनी मौसम के लिए देय उचित और लाभकारी मूल्य निम्नलिखित सारणी में दिए गए हैं:-

#E$tab_1

चीनी मूल्य निर्धारण नीति

चीनी के मूल्य बाजार के रुझानों के अधीन होते हैं और चीनी की मांग तथा आपूर्ति पर निर्भर होते हैं। तथापि, किसानों के हितों के संरक्षण के उद्देश्य से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) की अवधारणा दिनांक 07.06.2018 से लागू की गई है, ताकि यह उद्योग कम से कम, चीनी की न्यूनतम उत्पादन लागत निकाल सके, ताकि वह किसानों के गन्ना मूल्य बकाया का भुगतान करने में समर्थ हो सके।

सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 की उप धारा (2) के खंड (ग) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चीनी मूल्य (नियंत्रण) आदेश, 2018 अधिसूचित किया है। उक्त आदेश के प्रावधानों के अंतर्गत सरकार ने घरेलू खपत के लिए चीनी मिलों द्वारा कारख़ाना द्वार पर बिक्री हेतु सफेद/रिफाईंड चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य दिनांक 07.06.2018 से 29/- रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) का निर्धारण गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तथा सर्वाधिक कार्य कुशल मिलों की न्यूनतम परिवर्तन लागत के घटकों को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार ने दिनांक 14.02.2018 से सफेद/रिफाईंड चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में संशोधन करके इसे 29/- रुपए प्रति किलोग्राम से 31/- रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया है।

इथेनोल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (ईबीपी कार्यक्रम)

इथेनोलकृषि आधारित उत्‍पाद है, जिसका उत्पादन मुख्यतः चीनी उद्योग के सह-उत्पाद अर्थात शीरे से किया जाता है। गन्ने के अधिशेष उत्‍पादन वाले वर्षों में, जब चीनी की कीमतें काफी कम हो जाती हैं तो चीनी उद्योग किसानों के गन्‍ने की कीमत का समय पर भुगतान करने में असमर्थ हो जाता है। इथेनोल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदूषण को कम करने के लिए मोटर स्पिरिट के साथ इथेनोल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को प्राप्त करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और चीनी उद्योग में मूल्य वर्धन में वृद्धि करना है ताकि वे किसानों को गन्‍ना मूल्‍य की बकाया राशि का भुगतान कर सकें।

केन्द्रीय सरकार ने इथेनोल मिश्रित कार्यक्रम (ईबीपी) के अंतर्गत ब्लेंडिंग का लक्ष्य 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। समस्त इथेनोल आपूर्ति श्रृंखला को सुप्रवाही बनाने के लिए इथेनोल मिश्रित कार्यक्रम के अंतर्गत इथेनोल की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और इथेनोल का लाभकारी डिपो-द्वार मूल्य निर्धारित किया गया है। नए ब्लेंडिंग लक्ष्य को प्राप्त करना सुगम बनाने के लिए डिस्टिलरियों को ओएमसी डिपुओं से जोड़ने वाली एक "ग्रिड” तैयार की गई है और आपूर्ति की जाने वाली मात्रा का ब्यौरा तैयार किया गया है। दूरी, क्षमता तथा अन्य क्षेत्रवार मांगों को ध्यान में रखते हुए राज्यवार मांग प्रोफाईल का भी अनुमान लगाया गया है। चीनी मिलों द्वारा इथेनोल ब्लेंडिंग कार्यक्रम हेतु तेल विपणन कम्पनियों को वर्ष 2015-16 (10 अगस्‍त, 2016 तक) के दौरान आपूर्ति किए जाने वाले इथेनोलपर उत्पाद शुल्क भी माफ कर दिया गया है।

इसके परिणाम बहुत ही उत्‍साहजनक रहे हैं तथा आपूर्ति प्रतिवर्ष दोगुनी हो गई है। वर्ष 2013-14 में, ब्‍लेंडिंग हेतु केवल 38 करोड़ लीटर इथेनोल की आपूर्ति की गई थी, जबकि 2014-15 में संशोधित ईबीपी के तहत आपूर्ति बढ़कर 67 करोड़ लीटर हो गई है। इथेनोल मौसम 2015-16 में इथेनोल आपूर्ति ऐतिहासिक रूप से अधिक रही है तथा यह बढ़कर 111 करोड़ के पार हो गई है तथा इसने 4.2 प्रतिशत का ब्‍लेंडिग लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिया है। इथेनोल मौसम 2016-17 में, दिए गए 80 करोड़ लीटर के ठेके में से लगभग 66.51 करोड़ लीटर की आपूर्ति कर दी गई है।

इसके अलावा, इथेनोल मौसम 2017-18 में164करोड़ लीटर की आपूर्ति के लिए करार पर हस्ताक्षर किए गए हैं,जिनमें से150.5करोड़ लीटर अब तक आपूर्ति की जा चुकी हैं। वर्तमान इथेनोल मौसम 2018-19 (दिसंबर-नवंबर) के दौरान, 237.62 करोड़ लीटर की संविदाकृत मात्रा में से दिनांक 02.05.2019 तक लगभग 94 करोड़ लीटर की आपूर्ति की जा चुकी है।

इथेनोल मौसम 2018-19 (दिसंबर-नवंबर) के लिए इथेनोल के लाभकारी मूल्य का निर्धारण

चीनी क्षेत्र को सहायता प्रदान करने और गन्‍ना किसानों के हित को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने सी-हेवी शीरे से व्‍युत्‍पन्‍नइथेनोलका मिल-द्वार पर लाभकारी मूल्‍य 43.46 रुपए प्रति लीटर की दर से निर्धारित किया है। पहली बार सरकार ने बी-हेवी शीरे से व्‍युत्‍पन्‍नइथेनोलका मिल-द्वार मूल्‍य भी 52.43 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया है और जो मिलें चीनी का उत्‍पादन न करते हुए इथेनोल के उत्‍पादन के लिए 100 प्रतिशत गन्‍ने के रस का उपयोग करेंगी और चीनी का उत्पादन नहीं करेंगी, उनके लिए 59.13 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया है। इससे चीनी मिलों की नकदी की स्थिति में सुधार होगा और वे किसानों के गन्ना मूल्य बकाया का भुगतान करने में समर्थ हो सकेंगी।


इथेनोल ब्लेंडिंग पेट्रोल कार्यक्रम के अंतर्गत इथेनोल की आपूर्ति में वृद्धि करने के लिए इथेनोल उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु उठाए गए कदम

(i) इथेनोल उत्पादन क्षमता में विस्तार करने और इसे बढ़ाने के लिए चीनी मिलों कोवित्तीय सहायता प्रदान करने संबंधी स्कीम

इथेनोल के उत्‍पादन की क्षमता बढ़ाने तथा इस प्रकार इथेनोल के उत्‍पादन के लिए चीनी प्रयुक्त करने की अनुमति भी प्रदान करने के लिए नई डिस्‍टिलरियों की स्थापना/मौजूदा डिस्‍टिलरियों के विस्‍तार तथा इंसीनरेशन बॉयलर की स्थापना अथवा जीरो लिक्‍विड डिस्‍चार्ज के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अनुमोदित कोई अन्य विधि प्रयुक्त करने के लिए बैंकों के माध्‍यम से 6139 करोड़ रुपए का सरल ऋण प्रदान करने हेतु सैद्धांतिक अनुमोदन प्रदान किया गया है, जिसके लिए सरकार 1332 करोड़ रुपए की ब्‍याज छूट वहन करेगी। इस उपाय के परिणामस्‍वरूप लगभग 114 चीनी मिलों को लाभ मिलने की संभावना है और आने वाले 3 वर्षों के दौरान देश में चीनी मिलों की इथेनोल उत्‍पादन क्षमता 200 करोड़ लीटर प्रति वर्ष बढ़ने की संभावना है।

(ii) इथेनोल उत्पादन क्षमता में विस्तार करने और इसे बढ़ाने के लिए चीनी मिलों कोवित्तीय सहायता प्रदान करने संबंधी नई स्कीम

इथेनोल उत्पादन क्षमता में विस्तार करने और इसे बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु सरकार ने दिनांक 08.03.2019 को एक नई स्कीम अधिसूचित की है। इस स्कीम के अंतर्गत सरकार इथेनोल उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने के लिए बैंकों द्वारा चीनी मिलों को 12900 करोड़ रुपए की संकेतात्मक ऋण राशि प्रदान करने के लिए ब्याज छूट हेतु 2790 करोड़ रुपए वहन करेगी।

(iii) शीरा आधारित स्टैंड-एलोन डिस्टिलरियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु स्कीम

शीरा आधारित स्टैंड-एलोन डिस्टिलरियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतुसरकार ने दिनांक 08.03.2019 को एक स्कीम अधिसूचित की है। इस स्कीम के अंतर्गतसरकार शीरा आधारित स्टैंड-एलोन डिस्टिलरियों को अपनी इथेनोल उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने के लिए बैंकों द्वारा उन्हें 2600 करोड़ रुपए की संकेतात्मक ऋण राशि प्रदान करने के लिए ब्याज छूट हेतु 565 करोड़ रुपए वहन करेगी।

निर्यात-आयात नीति

(i) चीनी का निर्यात

चीनी एक आवश्‍यक जिंस है। मिलों से इसकी बिक्री, डिलीवरी और वितरण सरकार द्वारा आवश्‍यक जिंस अधिनियम, 1955 के तहत विनियमित किया जाता था। 15.01.1997 तक चीनी का निर्यात चीनी निर्यात संवर्द्धन अधिनियम, 1958 के उपबंधों के तहत अधिसूचित निर्यात एजेंसियों अर्थात भारतीय चीनी एवं सामान्‍य उद्योग निर्यात-आयात निगम लि. (आईएसजीआईईआईसी) तथा भारतीय राज्‍य व्‍यापार निगम लि. द्वारा किया जा रहा था।

एक अध्‍यादेश के माध्‍यम से, चीनी निर्यात संवर्द्धन अधिनियम, 1958 को 15.01.1997 से निरस्‍त कर दिया गया था और इस प्रकार चीनी के निर्यात को असरणीबद्ध कर दिया गया था। असरणीबद्ध व्‍यवस्‍था के तहत चीनी का निर्यात वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि तथा प्रसंस्‍कृत खाद्य उत्‍पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के माध्‍यम से किया जा रहा था। उसके बाद विभिन्‍न चीनी मिलों/व्‍यापारी निर्यातकों द्वारा शर्करा निदेशालय के निर्यात रिलीज आदेश प्राप्‍त करने के पश्‍चात चीनी का निर्यात किया गया।

2006-07 और 2007-08 के चीनी मौसमों के अधिशेष चरण के दौरान, दिनांक 31.07.2007 की अधिसूचना द्वारा रिलीज आदेशों को बिना चीनी का निर्यात करने की अनुमति दी गयी। तत्‍पश्‍चात 01.01.2009 से रिलीज आदेश प्राप्‍त करने की अपेक्षा पुन: लागू कर दी गयी थी क्‍योंकि देश में चीनी का उत्‍पादन कम हो गया था। तथापि, 2010-11 चीनी मौसम के दौरान उत्पादन में हुई वृद्धि के कारण, सरकार ने खुले सामान्‍य लाइसेंस के तहत रिलीज आदेश की मात्रा के आधार पर चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी थी।

अधिशेष उत्‍पादन की स्‍थिति जारी रही तथा सरकार ने दिनांक 11.05.2012 की अधिसूचना संख्‍या 1059 (अ) के तहत निर्यात निर्गम आदेशों की अपेक्षा को पुन: समाप्‍त कर दिया है। इसके बाद, डीजीएफटी के पास मात्रा के पूर्व रजिस्‍ट्रेशन के अध्‍यधीन चीनी के निशुल्‍क निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी गयी थी। बाद में 07.09.2015 से पूर्व रजिस्‍ट्रेशन (आर.सी.) की अपेक्षा को समाप्‍त कर दिया गया था।

इसके अलावा, राजस्व विभाग की अधिसूचना सं. 37/2016 दिनांक 16.06.2016 द्वारा चीनी के निर्यात पर 20% की दर से सीमा शुल्क लगा दिया गया था। चीनी के उत्पादन, इसके स्टॉक की स्थिति और बाजार में इसके मूल्य के रुझानों को देखते हुए भारत सरकार ने अधिसूचना सं. 30/2018 दिनांक 20.03.2018 द्वारा चीनी के निर्यात पर सीमा शुल्क वापस ले लिए है, जो अब भी लागू है।

(ii) चीनी का आयात

चीनी का आयात मार्च, 1994 में शून्य शुल्‍क पर खुले सामान्‍य लाइसेंस के अधीन रखा गया था और यह 27.04.1999 तक शून्य शुल्क के साथ जारी रखा गया था। सरकार ने 28.04.1998 से आयात की गई चीनी पर 5 प्रतिशत मूल सीमा शुल्‍क और 850.00 रुपये प्रति टन की दर से प्रतिशुल्‍क लगाया। प्रतिशुल्‍क के अतिरिक्‍त, 14.04.1999 से मूल सीमा शुल्‍क 5 प्रतिशत से बढ़ा कर 20 प्रतिशत कर दिया गया। वर्ष 1999-2000 के केन्‍द्रीय बजट में, आयात की गई चीनी पर शुल्‍क 20 प्रतिशत से और बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया था और इस पर 10 प्रतिशत अधिभार लगा दिया गया था। चीनी के आयात पर सीमा शुल्‍क पुन: बढ़ाकर 30.12.1999 को 40 प्रतिशत और 9.2.2000 को 60 प्रतिशत कर दिया गया और इसके साथ 950 रुपये प्रति टन प्रतिशुल्‍क (दिनांक 01.03.2008 से) जमा 3 प्रतिशत शिक्षा उपकर भी बरकरार रहा।

चीनी मौसम 2008-09केदौरानचीनीकेउत्‍पादन मेंगिरावटआई थी और चीनीकेघरेलूस्‍टॉककोबढ़ानेकेलिए केंद्रसरकारनेशून्‍यशुल्क परखुले सामान्‍य लाइसेंस के तहत दिनांक 17.04.2009 से कच्‍चीचीनीकेआयातकीअनुमतिप्रदानकीथी, जो 30.06.2012तकजारी रही।इसकेपश्‍चातदिनांक 13.07.2012से10 प्रतिशत की सामान्‍यदरसेपुनः शुल्‍कलगायागया जो बाद में बढ़ाकर 08.07.2013 से 15% कर दिया गया था।

देश में चीनी का सरप्लस स्‍टॉक होने के कारण तथा संभावित आयातों पर निगरानी रखने के लिए, सरकार ने 21.08.2014 से आयात शुल्‍क को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है, जिसे बाद में 30.04.2015 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया था जिसे बाद में 10.07.2017 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था। चीनी के अनावश्यक आयात को रोकने और घरेलू मूल्य को वाजिब स्तर पर स्थिर बनाए रखने के लिए केन्द्रीय सरकार ने किसानों के हित में चीनी के आयात पर सीमा शुल्क दिनांक 06.02.2018 से 50% से बढ़ाकर 100% कर दिया है।

अंत्‍योदय अन्‍न योजना (एएवाई) परिवारों के लिए पीडीएस के माध्यम से चीनी के वितरण हेतु मौजूदा प्रणाली की समीक्षा

राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍यों पर लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के माध्यम से चीनी वितरित की जा रही थी जिसके लिए केंद्र सरकार उन्हें18.50रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिपूर्ति कर रही थी। इस स्‍कीम में 2001 की जनगणना के अनुसार देश की गरीबी रेखा से नीचे की सम्‍पूर्ण आबादी तथा पूर्वोत्‍तर राज्‍यों/विशेष श्रेणी/पहाड़ी राज्‍यों और द्वीप-समूहों की समस्‍त आबादी कवर की जा रही थी। अब सभी 36 राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम,2013 का सर्वसुलभ रूप से कार्यान्वयन किया जा रहा है। एनएफएसए के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे की कोई पहचान श्रेणी नहीं की जाती है; तथापि,अंत्‍योदय अन्‍न योजना के लाभार्थियों की स्‍पष्‍ट रूप से पहचान की जाती है। भारत सरकार ने चीनी राजसहायता स्‍कीम की समीक्षा की है और समाज के निर्धनतम वर्ग अर्थात् अंत्‍योदय अन्‍न योजना के परिवारों के लिए आहार में ऊर्जा के स्रोत के रूप में चीनी की खपत तक पहुंच देने का निर्णय लिया है। तदनुसार,यह निर्णय लिया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए चीनी वितरण की मौजूदा प्रणाली निम्‍नानुसार जारी रखी जाए:-

(i) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए चीनी वितरण की मौजूदा प्रणाली अंत्‍योदय अन्‍न योजना के परिवारों के सीमित कवरेज के लिए जारी रखी जाए। प्रत्‍येक अंत्‍योदय अन्‍न योजना के परिवार को एक किलोग्राम चीनी प्रदान की जाए।

(ii) अंत्‍योदय अन्‍न योजना की आबादी के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए चीनी वितरण करने हेतु केंद्रीय सरकार द्वारा राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को 18.50 रूपये प्रति किलोग्राम की दर पर वर्तमान स्‍तर की राजसहायता जारी रखी जाए। राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र परिवहन, हैंडलिंग और डीलर के कमीशन आदि पर आने वाले अतिरिक्‍त व्‍यय को लाभार्थियों के लिए 13.50 रूपये प्रति किलोग्राम के खुदरा निर्गम मूल्‍य से ऊपर उन पर डाल सकते हैं अथवा स्‍वयं वहन कर सकते हैं।

संशोधित स्कीम में 16 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र भाग ले रहे हैं और वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान 5 और राज्यों द्वारा इसमें भाग लेने की संभावना है।

डा. सी. रंगाराजन समिति की सिफारिशों के आधार पर चीनी क्षेत्र को नियंत्रण मुक्‍त करना

वर्ष 2013-14 चीनी क्षेत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष था। केंद्र सरकार ने चीनी क्षेत्र के विनियंत्रण से संबंधित डॉ. सी रंगराजन की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफ़ारिशों पर विचार किया था और सितम्बर, 2012 के बाद उत्पादित चीनी पर मिलों की लेवी बाध्यता की प्रणाली को समाप्त करने और चीनी की खुले बाजार में बिक्री संबंधी विनियमित निर्गम तंत्र को समाप्त करने का निर्णय लिया था। चीनी क्षेत्र का विनियंत्रण चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति में सुधार करने, नकद प्रवाह में वृद्धि करने, इनवेंटरी लागत को कम करने और गन्ना किसानों को उनके गन्ना मूल्य के यथासमय भुगतान के लिए किया गया था। गन्ना क्षेत्र आरक्षण, न्यूनतम दूरी संबंधी मानदंड और गन्ना मूल्य फार्मूला को अपनाने के बारे में समिति द्वारा की गई सिफ़ारिशें निर्णय एवं कार्यान्वयन हेतु राज्य सरकारों को भिजवा दी गई हैं, जैसा वे उचित समझें। समिति की सिफ़ारिशों के सारांश एवं सरकार द्वारा उन पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा निम्नानुसार है:-

डा. रंगराजन समिति की सिफारिशों का कार्यान्‍वयन

#E$tab_2