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1960 के दशक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली 


अन्तर-युद्ध अवधि के दौरान भारत में आवश्यक वस्तुओं का सार्वजनिक वितरण अस्तित्व में था। तथापि, 1960 के दशक में खाद्यान्नों की अत्यधिक कमी के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्भव हुआ था, जिसमें कमी वाले शहरी क्षेत्रों में खाद्यान्नों के वितरण पर ध्यान केन्द्रित किया गया था। चूंकि हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई थी, इसलिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का विस्तार 1970 और 1980 के दशकों में अत्यधिक निर्धनता वाले जनजातीय ब्लॉकों और क्षेत्रों तक किया गया था।