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स्टील साईलोज का निर्माण

सरकार देश में उत्पादन और उपभोग करने वाले सभी क्षेत्रों में 100 लाख टन क्षमता के स्टील साईलो के निर्माण के लिए एक कार्य योजना कार्यान्वित कर रही है।

बल्क हैंडलिंग सुविधा युक्त स्टील साईलो खाद्यान्नों के थोक भंडारण का अत्यधिक यंत्रीकृत एवं आधुनिक तरीका है। साईलो में खाद्यान्नों का न केवल बेहतर परिरक्षण सुनिश्चित किया जाता है, बल्कि उनके जीवन काल (शेल्फ लाइफ) में भी वृद्धि की जाती है। साईलो में भंडारण में रखे गए खाद्यान्नों का थोक परिवहन किया जाता है; इस प्रकार चोरी और ऊठाईगीरी से होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखा जाता है। साईलो के लिए पारम्परिक भंडारण वेयरहाऊसों की तुलना में भूमि लगभग एक-तिहाई अपेक्षित होती है और इसे दिन-रात प्रचलित किया जा सकता है, जो सुविधाजनक होता है और इससे खाद्यान्नों के भंडारण, हैंडलिंग और ढुलाई की समग्र कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। इस प्रकार, एक कार्य कुशल खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली के निर्माण के लिए साईलो का निर्माण करना करना पूरे देश के लिए लाभदायक होगा।

भंडारण सुविधाओं के आधुनिकीकरण और स्टील साईलो के निर्माण की प्रगति (दिनांक 31.08.2019 की स्थिति के अनुसार) निम्नानुसार है:-

निर्माण किए गए साईलो : 7.25 लाख टन (15 स्थानों पर)

निर्माण चल रहा है : 5.50 लाख टन (10 स्थानों पर)

आगे कार्य सौंपा गया है : 31.50 लाख टन (60 स्थानों पर)

निविदा कार्रवाई की जा रही है/पुनः निविदा दी जानी है : 8.00 लाख टन (16 स्थानों पर)

निविदाओं हेतु उच्च स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित स्थान : 30.50 लाख टन (35 स्थानों पर)

योग : 82.75 लाख टन

बिहार में कैमूर तथा बक्सर में चावल साईलो के निर्माण हेतु पाइलट परियोजनाएं शुरू की गई हैं।