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आधुनिक साइलो का निर्माण

    स्‍टील साइलो के निर्माण की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं:-

  • स्‍टील साइलो का निर्माण निजी निवेशकों तथा केन्द्रीय भण्डारण निगम (सीडब्ल्यूसी)/राज्य भण्डारण निगमों (एसडब्ल्यूसी)/अन्य राज्य एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
  • निर्माण की पीपीपी पद्धति के मामले में साइलो का निवेश, निर्माण और प्रचालन निजी पार्टी द्वारा तथा निर्माण की ईपीसी पद्धति के मामले में सीडब्ल्यूसी/राज्य सरकार/एजेंसियों द्वारा किया जाता है। निजी पार्टी/सीडब्ल्यूसी/एसडब्ल्यूसी द्वारा निर्मित साइलो के लिए निवेश से आय के रूप में भारतीय खाद्य निगम 30 वर्षों हेतु किराए की गारंटी देता है।
  • निर्माण निम्नलिखित मॉडलों में किया जा सकता है:

    1. व्यवहार्यता गैप फंडिंग (वीजीएफ) मॉडल: एफसीआई/सीडब्ल्यूसी/राज्य एजेंसियों की भूमि पर पीपीपी पद्धति से।

    2. गैर-वीजीएफ मॉडल: निजी पार्टियों की भूमि पर।

    3. वीजीएफ-डीईए मॉडल: भूमि की लागत के भुगतान पर सरकार को हस्तांतरित निजी पार्टियों की भूमि पर।

  • निर्माण सीडब्ल्यूसी/ एसडब्ल्यूसी द्वारा कंपनी के स्वामित्व की और कंपनी द्वारा प्रचालित (सीओसीओ) मॉडल में उन स्थानों पर भी किया जा सकता है जहां जमीन उनके पास उपलब्ध है। निर्माण और प्रचालन की जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी/एसडब्ल्यूसी की होती है।
  • वीजीएफ मॉडल में बोली लगाने के दौरान सरकार से वीजीएफ के रूप में कुल परियोजना लागत के 20% तक की मांग की जा सकती है।
  • बोली पैरामीटर वीजीएफ मॉडल के मामले में उच्चतम प्रीमियम/न्यूनतम अनुदान और गैर-वीजीएफ मॉडल के मामले में न्‍यूनतम भंडारण प्रभार है।
  • राज्य स्तरीय समितियों द्वारा भंडारण आवश्यकताओं के अनुसार गोदामों हेतु स्थान और क्षमता पहचानी जाती है और अंतिम अनुमोदन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, भारतीय खाद्य निगम की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) द्वारा दिया जाता है।
  • साइलो की मानक क्षमता 50,000 टन है, लेकिन यह क्षमता आवश्यकता के आधार पर 25,000 टन के गुणक में भी हो सकती है।
  • निजी पार्टी का चयन खुले विज्ञापन और दो चरण निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।
  • साइलो का निर्माण भारतीय खाद्य निगम द्वारा निर्धारित विनिर्दिष्‍टियों के अनुसार किया जाना चाहिए।
  • निर्माण की अवधि लगभग दो वर्ष है, जैसा कि निविदा दस्तावेज में निर्धारित है।
  • निजी पार्टी कोई व्यक्ति या साझेदारी फर्म या कंपनी या ट्रस्ट हो सकता है।
  • 50,000 टन की क्षमता के लिए लगभग 11 एकड़ का भूमि क्षेत्र अपेक्षित है, जिसमें साइलो हेतु लगभग 7 एकड़ और रेलवे साइडिंग हेतु 4 एकड़ भूमि शामिल है।
  • वीजीएफ मॉडल में रियायत की अवधि समाप्त होने के बाद यह सुविधा सरकार को हस्तांतरित कर दी जाती है। तथापि गैर-वीजीएफ मॉडल में स्वामित्व निजी पार्टी के पास होता है।
  • भंडारण और अन्य प्रभारों का भुगतान रियायत करार की शर्तों और निबंधनों के अनुसार किया जाता है।