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केन्द्रीय क्षेत्र की (योजना) स्कीम "भंडारण और गोदाम" (पूर्वोत्तर क्षेत्र पर केन्द्रित)

  • यह विभाग पूर्वोत्तर क्षेत्र में गोदामों के निर्माण के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की (योजना) स्कीम क्रियान्वित कर रहा है, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र में क्षमता वर्धन पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
  • यह योजना कुछ अन्य राज्यों में भी क्रियान्वित की गई है। इस योजना की वर्तमान अवधि दिनांक 01.04.2017 से 31.03.2020 तक है।
  • भूमि के अधिग्रहण के लिए भारतीय खाद्य निगम को इक्विटी के रूप में और भंडारण गोदामों के निर्माण तथा इससे जुड़े बुनियादी ढ़ांचे जैसे रेलवे साइडिंग, विद्युतीकरण और वे-ब्रिज आदि के लिए निधियां जारी की जाती है।
  • मध्यवर्ती भंडारण गोदामों के निर्माण के लिए भी पूर्वोत्तर राज्यों की राज्य सरकारों और जम्मू एवं कश्मीर को अनुदान सहायता के रूप में के निधियां जारी की जाती हैं। भारतीय खाद्य निगम डिपो में संग्रहित खाद्यानों के भंडारण के लिए यह विभाग राज्य सरकारों से ब्लॉक/तालुका स्तर पर मध्यवर्ती भंडारण क्षमता के निर्माण के लिए अनुरोध कर रहा है, ताकि उनका आगे वितरण उचित दर दुकानों को किया जा सके। यह लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) की आपूर्ति श्रृखला में सुधार के लिए आवश्यक है। मध्यवर्ती गोदामों के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, तथापि, यह विभाग सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों को उनकी कठिन भौगोलिक स्थितियों पर विचार करते हुए इस प्रयोजनार्थ योजना निधियां प्रदान कर रहा है।
  • भारतीय खाद्य निगम द्वारा निर्माण किए जाने वाले गोदामों की न्यूनतम क्षमता समतल क्षेत्र में 5000 टन (100 किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र को शामिल करते हुए) होगी और पर्वतीय क्षेत्र में 1670 टन (50 किलोमीटर की परिधि के क्षेत्र को शामिल करते हुए) होगी।
  • राज्य सरकार द्वारा निर्माण किए जाने वाले मध्यवर्ती गोदामों की क्षमता अधिमानतः न्यूनतम 100 टन होनी चाहिए तथा वे आईएस कोड 16144 : 2014 के अनुरूप होने चाहिएI
  • भंडारण अंतर का आकलन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 4 महीनों की आवश्यकता के आधार पर किया जाना है।
  • गोदामों का निर्माण केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग/राज्य लोक निर्माण विभाग अथवा निर्माण कार्य में संलग्न राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग द्वारा किया जाना चाहिए।
  • निर्माण कार्य परियोजना की समय सूची (डीपीआर के अनुसार) के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
  • उपयोग प्रमाण पत्र निधियां जारी किए जाने के एक वर्ष के भीतर निर्धारित प्रारूप (जीएफआर के अनुसार) में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।