• पिछला अद्यतनीकृतः: 28 मार्च 2019
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सतर्कता प्रभाग के संक्षिप्‍त कार्य

विभाग, इसके संबद्ध कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों यथा- भारतीय खाद्य निगम और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के संबंध में सतर्कता मामलों/ शिकायतों का निपटान करता है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों के संबंध में अचल सम्‍पत्तियों और चल/अचल सम्‍पत्ति के अधिग्रहण/निपटान के वार्षिक विवरणों का रिकार्ड रखना।

खाद्य विभाग के समूह ‘क’ के अधिकारियों और अन्‍य अधिकारियों तथा भारतीय खाद्य निगम एवम केन्द्रीय भण्डारण निगम के बोर्ड स्तरीय अधिकारियों के संबंध में सतर्कता निकासी जारी करना।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग को विभिन्न प्रकार की रिपोर्टें अर्थात मासिक रिपोर्ट, त्रैमासिक रिपोर्ट, परिचयात्मक सामग्री, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट हेतु सामग्री आदि प्रस्तुत करना। प्रत्येक वर्ष सतर्कता जागरूकता सप्‍ताह का आयोजन करना।

सतर्कता प्रभाग की संक्षिप्‍त गतिविधियां

खाद्य और सार्वजनिक वितरण प्रभाग में, सतर्कता प्रशासन की अध्‍यक्षता अतिरिक्‍त प्रभार आधार पर संयुक्‍त सचिव स्‍तर के केन्‍द्रीय सतर्कता अधिकारी द्वारा की जाती है। विभाग में एक उप सचिव, एक अवर सचिव और डेस्‍क अधिकारी के अलावा, मंत्रालय के चार लिपिकीय कर्मचारी उनकी सहायता करते हैं। इस विभाग के अनुसूची "क” के दो उपक्रमों अर्थात भारतीय खाद्य निगम और केन्द्रीय भंडारण निगम में सतर्कता प्रशासन का कार्य संयुक्त सचिव स्तर के पूर्णकालिक मुख्य सतर्कता अधिकारी देखते हैं, जो नई दिल्ली स्थित संबन्धित मुख्यालयों में कार्यरत हैं। अन्य शहरों में स्थित अधीनस्थ कार्यालयों में एक उपयुक्त वरिष्ठ अधिकारी को सतर्कता प्रशासन का कार्य सौंपा गया है।

उपर्युक्‍त सतर्कता तंत्र में सीवीसी द्वारा समय-समय पर जारी निर्धारित मार्गदर्शी सिद्धांतों का अनुपालन किया जाता है। इस समय सहभागी सतर्कता पर ध्यान केन्द्रित किया गया है अर्थात सामान्य व्यक्ति विशेष रूप से राजसहायता प्राप्त खाद्यान्नों के लाभार्थियों के शामिल किया जाता है और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्य हितधारकों अर्थात राज्य और केन्द्रीय सरकार के स्तर पर पीडीएस मशीनरी को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। दंड देने की अपेक्षा निवारक सिद्धान्‍त पर बल दिया जा रहा है और दोषयुक्‍त प्रणाली और प्रक्रियात्‍मक खामियों का पता लगाया जा रहा है जिसमें भूल-चूक लेनी देनी के कार्यों की अनुमति होती है।

भ्रष्‍टाचार से निपटने के लिए विस्‍तृत नियमों और विनियमों के अलावा उपलब्‍ध नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल किया जाता है और भ्रष्‍टाचार से निपटने के लिए अन्‍य नए साधनों जैसे रोटेशनल ट्रांसफर, फाइल संचालन प्रणाली, वार्षिक सम्‍पत्‍ति रिटर्न की सम्पूर्ण जांच का प्रयोग किया जा रहा है।

केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग और मंत्रिमण्‍डल सचिवालय और कार्मिक प्रशिक्षण विभाग पारस्‍परिक सेमिनारों के माध्‍यम से भ्रष्‍टाचार-रोधी गति का भी ध्‍यान रखता है और मंत्रालयों के परस्‍पर संवाद को बनाए रखता है।

उपर्युक्‍त सक्रिय दृष्‍टिकोण के कारण सार्वजनिक उपक्रमों यथा भारतीय खाद्य निगम और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कारपोरेशन दोनो में लंबित सतर्कता मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

लंबित कार्यों को कम करने के लिए इस दृष्‍टिकोण से इतर नई पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

साथ ही साथ, जैसा कि पहले ही कहा गया है, वर्तमान में सीवीसी प्रायोजित ई-प्रोक्‍यूरमेंट (ई-खरीद) पर बल दिया जा रहा है ताकि सरकारी खरीद को पूर्णतया निष्पक्ष रूप में सुनिश्‍चित किया जा सके। इसके लिए सरकार की आवश्‍यकताओं का समय पर अनुमान लगाये जाने और उसके उपरांत एनइटी पर इसे प्रदर्शित करने और उसके बाद खरीद प्रक्रिया में की गई प्रगति को ऑनलाइन प्रदर्शन के माध्‍यम से प्रदर्शित करते हुए और ई-पेमेंट से इसे समाप्‍त करते हुए संपूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा रहा है।

आम जनता के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है ताकि नागरिकों और सरकारी कार्मिकों के बीच अनावश्‍यक पत्राचार से बचा जा सके। लोक शिकायतों का यथासमय निपटान सुविज्ञता और सहानुभूतिपूर्वक सुनिश्चित करने के लिए सॉफ्टवेयर को नागरिक अनुकूल तरीके से डिजाइन किया जा रहा है। सतर्कता प्रभाग ने सामान्‍य व्‍यक्‍ति और खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के बीच दूरी कम करने के लिए सामान्‍य जनता के प्रयोगार्थ प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्‍नों का एक सेट (द्विभाषी रूप में) भी तैयार किया है।